1. प्रशंसा पाने के लिए व्यक्ति क्या-क्या नहीं करता है. हर अच्छे काम का श्रेय स्वयं ही लेना चाहता है. इससे जान-अनजाने इन छोटी-छोटी बातों से हममें अभिमान की भावना पनपने लगती है.
2. इसी अभिमान-वश हमसे कई बार ऎसी गलतियाँ भी हो जातीं हैं, जिन पर ठंडे दिमाग से सोचने पर हमें ग्लानि का अहसास होने लगता है.
3. कई बार श्रेय लेने की होड़ में हम सही गलत का भेद भी भूल जाते हैं.
4. ऎसी भावना से मुक्त होने का सरलतम मार्ग है कि हम अपने समस्त कार्यों का श्रेय ईश्वर को सौंप दें. इससे न तो हममें अभिमान का भाव पैदा होगा और न ही अपने कार्यों के प्रति किसी प्रकार की आसक्ति ही होगी.
5. यदि कभी आप अपने द्वारा किये गए कार्य का श्रेय किसी दूसरे को देकर देखें , एक अदभुत सी ख़ुशी और आत्मिक संतोष महसूस होता है.
6. ऐसा करके आप जिसे श्रेय देंगे उसकी नज़रों में आपकी इज़्ज़त कितनी बढ़ जायेगी इस प्रकार आप उसका दिल जीत सकते हैं. अपने आप को विनम्र और सहिष्णु बनाने का यह सर्व-श्रेष्ठ तरीका है.
7. इससे आपमें संतोष की भावना सुदृढ़ होगी. आप सही मायनों में अपने जीवन से सन्तुष्ट होंगे.
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